आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2083 · माघ
1 फ़रवरी 2027 का पंचांग
सोमवार · माघ कृष्ण दशमी
1 फ़रवरी 2027, सोमवार को माघ कृष्ण दशमी है, सुबह 8:42 तक; उसके बाद एकादशी। नक्षत्र ज्येष्ठा है, 2 फ़रवरी, सुबह 9:22 तक। सूर्योदय सुबह 7:10 और सूर्यास्त शाम 6:00। राहु काल सुबह 8:31 से सुबह 9:52 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
1 फ़रवरी 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- माघ कृष्ण दशमीसुबह 8:42 तक, फिर एकादशी
- नक्षत्र
- ज्येष्ठा2 फ़रवरी, सुबह 9:22 तक, फिर मूल
- योग
- ध्रुवशाम 4:56 तक, फिर व्याघात
- करण
- विष्टि (भद्रा)सुबह 8:42 तक
- वार
- सोमवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- माघ (पूर्णिमांत)पौष (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2083
- चंद्र राशि
- वृश्चिकसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- मकर
- सूर्योदय
- सुबह 7:10
- सूर्यास्त
- शाम 6:00
- चंद्रोदय
- रात 3:09
- चंद्रास्त
- दोपहर 1:19
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:34 से सुबह 6:22 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- दोपहर 12:13 से दोपहर 12:56 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:23 से दोपहर 3:07 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 8:31 से सुबह 9:52 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 11:13 से दोपहर 12:35 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 1:56 से दोपहर 3:17 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। फ़रवरी 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
कृत्तिवासी रामायण
बांग्ला · उनतालीस में से एक
बांग्ला की वह रामकथा जो पयार छंद में, गाकर सुनाने के लिए लिखी गई। परंपरा कहती है कि गौड़ के एक राजा के कहने पर। यहाँ लंका की रक्षक लंकिनी नहीं, देवी चामुंडा हैं, जो हनुमान का नाम सुनते ही बिना लड़े कैलाश चली जाती हैं।