आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2083 · पौष
13 जनवरी 2027 का पंचांग
बुधवार · पौष शुक्ल पंचमी
13 जनवरी 2027, बुधवार को पौष शुक्ल पंचमी है, दोपहर 1:02 तक; उसके बाद षष्ठी। नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद है, रात 10:05 तक। सूर्योदय सुबह 7:15 और सूर्यास्त शाम 5:44। राहु काल दोपहर 12:30 से दोपहर 1:48 तक है। इस दिन स्कंद षष्ठी है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
13 जनवरी 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- पौष शुक्ल पंचमीदोपहर 1:02 तक, फिर षष्ठी
- नक्षत्र
- पूर्वा भाद्रपदरात 10:05 तक, फिर उत्तरा भाद्रपद
- योग
- वरीयानशाम 5:54 तक, फिर परिघ
- करण
- बालवदोपहर 1:02 तक
- वार
- बुधवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- पौष (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2083
- चंद्र राशि
- कुंभसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- धनु
- सूर्योदय
- सुबह 7:15
- सूर्यास्त
- शाम 5:44
- चंद्रोदय
- सुबह 10:18
- चंद्रास्त
- रात 10:40
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:39 से सुबह 6:27 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- दोपहर 12:09 से दोपहर 12:51 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है। बुधवार को इसे नहीं लेते।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:15 से दोपहर 2:57 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 12:30 से दोपहर 1:48 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 8:34 से सुबह 9:52 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 11:11 से दोपहर 12:30 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। जनवरी 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
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- मुफ़्त
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इस दिन की रामकथा
रामावतार
ब्रजभाषा · उनतालीस में से एक
दसम ग्रंथ के चौबीस अवतार में बीसवाँ, राम अवतार। ब्रजभाषा में है और गुरमुखी लिपि में लिखा है, और परंपरा इसे गुरु गोबिंद सिंह की रचना मानती है। यह 1698 में सतलुज के किनारे, नैना देवी पहाड़ी के नीचे पूरा हुआ। इसमें पूरा सुंदरकांड एक ही छंद में है: हनुमान जी अँगूठी लेकर जाते हैं, नगर जलाते हैं, अक्षय कुमार को मारते हैं और लौट आते हैं। इसके आख़िरी सवैया और दोहा आज भी रोज़ रहरास साहिब में पढ़े जाते हैं।