आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2083 · पौष
12 जनवरी 2027 का पंचांग
मंगलवार · पौष शुक्ल चतुर्थी
12 जनवरी 2027, मंगलवार को पौष शुक्ल चतुर्थी है, सुबह 11:30 तक; उसके बाद पंचमी। नक्षत्र शतभिषा है, रात 8:14 तक। सूर्योदय सुबह 7:15 और सूर्यास्त शाम 5:44। राहु काल दोपहर 3:06 से शाम 4:25 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
12 जनवरी 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- पौष शुक्ल चतुर्थीसुबह 11:30 तक, फिर पंचमी
- नक्षत्र
- शतभिषारात 8:14 तक, फिर पूर्वा भाद्रपद
- योग
- व्यतीपातशाम 5:58 तक, फिर वरीयान
- करण
- विष्टि (भद्रा)सुबह 11:30 तक
- वार
- मंगलवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- पौष (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2083
- चंद्र राशि
- कुंभसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- धनु
- सूर्योदय
- सुबह 7:15
- सूर्यास्त
- शाम 5:44
- चंद्रोदय
- सुबह 9:50
- चंद्रास्त
- रात 9:46
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:39 से सुबह 6:27 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- दोपहर 12:08 से दोपहर 12:50 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:14 से दोपहर 2:56 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 3:06 से शाम 4:25 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 9:52 से सुबह 11:11 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 12:29 से दोपहर 1:48 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। जनवरी 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
रामचंद्र चरित पुराण
कन्नड़ · उनतालीस में से एक
कन्नड़ की सबसे पुरानी बची हुई रामकथा, जैन परंपरा की, जिसे नागचंद्र ने लगभग 1100 ईस्वी में रचा। नागचंद्र को अभिनव पंप यानी नए पंप कहा गया, इसलिए इसे पंप रामायण भी कहते हैं। यहाँ रावण को लक्ष्मण मारते हैं, और रावण एक दुखी नायक है।