आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2083 · पौष
7 जनवरी 2027 का पंचांग
गुरुवार · पौष अमावस्या
7 जनवरी 2027, गुरुवार को पौष अमावस्या है, 8 जनवरी, रात 1:54 तक; उसके बाद प्रतिपदा। नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा है, 8 जनवरी, सुबह 9:13 तक। सूर्योदय सुबह 7:15 और सूर्यास्त शाम 5:40। राहु काल दोपहर 1:45 से दोपहर 3:03 तक है। इस दिन हनुमत जयंती (तमिल), पौष अमावस्या है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
7 जनवरी 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- पौष अमावस्या8 जनवरी, रात 1:54 तक, फिर प्रतिपदा
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढ़ा8 जनवरी, सुबह 9:13 तक, फिर उत्तराषाढ़ा
- योग
- ध्रुवदोपहर 2:26 तक, फिर व्याघात
- करण
- चतुष्पददोपहर 12:34 तक
- वार
- गुरुवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- पौष (पूर्णिमांत)मार्गशीर्ष (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2083
- चंद्र राशि
- धनुसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- धनु
- सूर्योदय
- सुबह 7:15
- सूर्यास्त
- शाम 5:40
- चंद्रोदय
- सुबह 6:55
- चंद्रास्त
- शाम 5:10
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:39 से सुबह 6:27 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- दोपहर 12:06 से दोपहर 12:48 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:11 से दोपहर 2:53 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 1:45 से दोपहर 3:03 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 7:15 से सुबह 8:33 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 9:51 से सुबह 11:09 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। जनवरी 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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इस दिन की रामकथा
रामचरितम्
पुराना मलयालम · उनतालीस में से एक
मलयालम की सबसे पुरानी बची हुई काव्य रचना, जिसे चीरामन ने लगभग बारहवीं सदी में रचा। इसमें कथा शुरू से नहीं चलती, सीधे लड़ाई वाले हिस्से से उठती है। यानी उस भाषा की शुरुआत ही लड़ाई वाले कांड से हुई, और भाषा भी ऐसी है जिसमें मलयालम और तमिल दोनों की छाया दिखती है।