आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2083 · पौष
6 जनवरी 2027 का पंचांग
बुधवार · पौष कृष्ण चतुर्दशी
6 जनवरी 2027, बुधवार को पौष कृष्ण चतुर्दशी है, रात 11:15 तक; उसके बाद अमावस्या। नक्षत्र मूल है, 7 जनवरी, सुबह 6:08 तक। सूर्योदय सुबह 7:15 और सूर्यास्त शाम 5:39। राहु काल दोपहर 12:27 से दोपहर 1:45 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
6 जनवरी 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- पौष कृष्ण चतुर्दशीरात 11:15 तक, फिर अमावस्या
- नक्षत्र
- मूल7 जनवरी, सुबह 6:08 तक, फिर पूर्वाषाढ़ा
- योग
- वृद्धिदोपहर 1:32 तक, फिर ध्रुव
- करण
- विष्टि (भद्रा)सुबह 9:56 तक
- वार
- बुधवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- पौष (पूर्णिमांत)मार्गशीर्ष (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2083
- चंद्र राशि
- धनुसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- धनु
- सूर्योदय
- सुबह 7:15
- सूर्यास्त
- शाम 5:39
- चंद्रोदय
- सुबह 6:07
- चंद्रास्त
- शाम 4:15
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:39 से सुबह 6:27 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- दोपहर 12:06 से दोपहर 12:48 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है। बुधवार को इसे नहीं लेते।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:11 से दोपहर 2:52 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 12:27 से दोपहर 1:45 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 8:33 से सुबह 9:51 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 11:09 से दोपहर 12:27 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। जनवरी 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
मापिला रामायणम्
मलयालम की मापिला बोली · उनतालीस में से एक
केरल के मापिला मुसलमानों के बीच गाया जाने वाला रामायण गीत, जिसे पिरांतन हसनकुट्टी गाते थे। इसका बस एक हिस्सा बचा है, जिसे 1976 में लिखकर दर्ज किया गया। रावण यहाँ लवणन है, सुल्तान जैसा, और गीत में हँसी भरी है।