आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2083 · पौष
4 जनवरी 2027 का पंचांग
सोमवार · पौष कृष्ण द्वादशी
4 जनवरी 2027, सोमवार को पौष कृष्ण द्वादशी है, शाम 6:16 तक; उसके बाद त्रयोदशी। नक्षत्र अनुराधा है, 5 जनवरी, रात 12:15 तक। सूर्योदय सुबह 7:15 और सूर्यास्त शाम 5:37। राहु काल सुबह 8:32 से सुबह 9:50 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
4 जनवरी 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- पौष कृष्ण द्वादशीशाम 6:16 तक, फिर त्रयोदशी
- नक्षत्र
- अनुराधा5 जनवरी, रात 12:15 तक, फिर ज्येष्ठा
- योग
- शूलदोपहर 12:04 तक, फिर गंड
- करण
- तैतिलशाम 6:16 तक
- वार
- सोमवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- पौष (पूर्णिमांत)मार्गशीर्ष (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2083
- चंद्र राशि
- वृश्चिकसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- धनु
- सूर्योदय
- सुबह 7:15
- सूर्यास्त
- शाम 5:37
- चंद्रोदय
- सुबह 4:19
- चंद्रास्त
- दोपहर 2:36
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:39 से सुबह 6:27 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- दोपहर 12:05 से दोपहर 12:47 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:10 से दोपहर 2:51 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 8:32 से सुबह 9:50 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 11:08 से दोपहर 12:26 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 1:44 से दोपहर 3:02 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। जनवरी 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
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- मुफ़्त
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इस दिन की रामकथा
कण्णस्स रामायणम्
मलयालम · उनतालीस में से एक
मलयालम की उस दौर की रामकथा जिसे निरणम के राम पणिक्कर ने चौदहवीं सदी में रचा, और जिसे कण्णस्स रामायणम् कहते हैं। एषुत्तच्छन से यह पुरानी है, और इसी तरह की रचनाओं ने उस भाषा को कथा कहने लायक बनाया। यह काम निरणम वाले कवियों के नाम से जाना जाता है।