आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2083 · पौष
1 जनवरी 2027 का पंचांग
शुक्रवार · पौष कृष्ण नवमी
1 जनवरी 2027, शुक्रवार को पौष कृष्ण नवमी है, दोपहर 1:11 तक; उसके बाद दशमी। नक्षत्र चित्रा है, शाम 5:30 तक। सूर्योदय सुबह 7:14 और सूर्यास्त शाम 5:35। राहु काल सुबह 11:07 से दोपहर 12:25 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
1 जनवरी 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- पौष कृष्ण नवमीदोपहर 1:11 तक, फिर दशमी
- नक्षत्र
- चित्राशाम 5:30 तक, फिर स्वाती
- योग
- अतिगंडसुबह 11:44 तक, फिर सुकर्मा
- करण
- गरदोपहर 1:11 तक
- वार
- शुक्रवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- पौष (पूर्णिमांत)मार्गशीर्ष (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2083
- चंद्र राशि
- तुलासूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- धनु
- सूर्योदय
- सुबह 7:14
- सूर्यास्त
- शाम 5:35
- चंद्रोदय
- रात 1:26
- चंद्रास्त
- दोपहर 12:42
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:38 से सुबह 6:26 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- दोपहर 12:04 से दोपहर 12:45 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:08 से दोपहर 2:50 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 11:07 से दोपहर 12:25 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 3:00 से शाम 4:18 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 8:32 से सुबह 9:49 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। जनवरी 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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इस दिन की रामकथा
वाल्मीकि रामायण
संस्कृत · उनतालीस में से एक
सबसे पुरानी रामकथा, और बाकी सबकी नींव। इसका सुंदरकांड अड़सठ सर्गों का है और पूरा का पूरा हनुमान पर टिका है, जो इस ग्रंथ में और कहीं नहीं होता। ब्योरे इसकी पहचान हैं: नगर के भीतर के घर, सोते हुए लोग, राक्षसियों के नाम, और बीच बीच में हनुमान का अपना सोचना।