आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2083 · मार्गशीर्ष
5 दिसंबर 2026 का पंचांग
शनिवार · मार्गशीर्ष कृष्ण द्वादशी
5 दिसंबर 2026, शनिवार को मार्गशीर्ष कृष्ण द्वादशी है, 6 दिसंबर, रात 12:53 तक; उसके बाद त्रयोदशी। नक्षत्र चित्रा है, सुबह 11:49 तक। सूर्योदय सुबह 6:59 और सूर्यास्त शाम 5:24। राहु काल सुबह 9:35 से सुबह 10:54 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
त्योहार
इस दिन कोई बड़ा त्योहार नहीं
अगला त्योहार: विवाह पंचमी · राम सीता विवाह, 14 दिसंबर 2026, सोमवार।
पंचांग
5 दिसंबर 2026 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- मार्गशीर्ष कृष्ण द्वादशी6 दिसंबर, रात 12:53 तक, फिर त्रयोदशी
- नक्षत्र
- चित्रासुबह 11:49 तक, फिर स्वाती
- योग
- सौभाग्यसुबह 7:53 तक, फिर शोभन
- करण
- कौलवदोपहर 12:16 तक
- वार
- शनिवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)कार्तिक (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2083
- चंद्र राशि
- तुलासूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- वृश्चिक
- सूर्योदय
- सुबह 6:59
- सूर्यास्त
- शाम 5:24
- चंद्रोदय
- रात 3:31
- चंद्रास्त
- दोपहर 2:40
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:23 से सुबह 6:11 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:51 से दोपहर 12:32 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 1:56 से दोपहर 2:37 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 9:35 से सुबह 10:54 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 1:30 से दोपहर 2:48 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 6:59 से सुबह 8:17 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। दिसंबर 2026 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
रामावतार
ब्रजभाषा · उनतालीस में से एक
दसम ग्रंथ के चौबीस अवतार में बीसवाँ, राम अवतार। ब्रजभाषा में है और गुरमुखी लिपि में लिखा है, और परंपरा इसे गुरु गोबिंद सिंह की रचना मानती है। यह 1698 में सतलुज के किनारे, नैना देवी पहाड़ी के नीचे पूरा हुआ। इसमें पूरा सुंदरकांड एक ही छंद में है: हनुमान जी अँगूठी लेकर जाते हैं, नगर जलाते हैं, अक्षय कुमार को मारते हैं और लौट आते हैं। इसके आख़िरी सवैया और दोहा आज भी रोज़ रहरास साहिब में पढ़े जाते हैं।