आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · पौष
21 दिसंबर 2027 का पंचांग
मंगलवार · पौष कृष्ण नवमी
21 दिसंबर 2027, मंगलवार को पौष कृष्ण नवमी है, 22 दिसंबर, रात 12:35 तक; उसके बाद दशमी। नक्षत्र हस्त है, 22 दिसंबर, रात 12:25 तक। सूर्योदय सुबह 7:09 और सूर्यास्त शाम 5:29। राहु काल दोपहर 2:54 से शाम 4:11 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
21 दिसंबर 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- पौष कृष्ण नवमी22 दिसंबर, रात 12:35 तक, फिर दशमी
- नक्षत्र
- हस्त22 दिसंबर, रात 12:25 तक, फिर चित्रा
- योग
- सौभाग्यदोपहर 3:33 तक, फिर शोभन
- करण
- तैतिलदोपहर 1:11 तक
- वार
- मंगलवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- पौष (पूर्णिमांत)मार्गशीर्ष (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- कन्यासूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- धनु
- सूर्योदय
- सुबह 7:09
- सूर्यास्त
- शाम 5:29
- चंद्रोदय
- रात 12:46
- चंद्रास्त
- दोपहर 12:35
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:33 से सुबह 6:21 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:58 से दोपहर 12:40 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:02 से दोपहर 2:43 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 2:54 से शाम 4:11 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 9:44 से सुबह 11:02 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 12:19 से दोपहर 1:36 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। दिसंबर 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
कण्णस्स रामायणम्
मलयालम · उनतालीस में से एक
मलयालम की उस दौर की रामकथा जिसे निरणम के राम पणिक्कर ने चौदहवीं सदी में रचा, और जिसे कण्णस्स रामायणम् कहते हैं। एषुत्तच्छन से यह पुरानी है, और इसी तरह की रचनाओं ने उस भाषा को कथा कहने लायक बनाया। यह काम निरणम वाले कवियों के नाम से जाना जाता है।