आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · मार्गशीर्ष
6 दिसंबर 2027 का पंचांग
सोमवार · मार्गशीर्ष शुक्ल अष्टमी
6 दिसंबर 2027, सोमवार को मार्गशीर्ष शुक्ल अष्टमी है, 7 दिसंबर, रात 12:00 तक; उसके बाद नवमी। नक्षत्र शतभिषा है, सुबह 11:41 तक। सूर्योदय सुबह 7:00 और सूर्यास्त शाम 5:24। राहु काल सुबह 8:18 से सुबह 9:36 तक है। इस दिन मासिक दुर्गाष्टमी है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
6 दिसंबर 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- मार्गशीर्ष शुक्ल अष्टमी7 दिसंबर, रात 12:00 तक, फिर नवमी
- नक्षत्र
- शतभिषासुबह 11:41 तक, फिर पूर्वा भाद्रपद
- योग
- वज्र7 दिसंबर, सुबह 6:47 तक, फिर सिद्धि
- करण
- विष्टि (भद्रा)सुबह 10:52 तक
- वार
- सोमवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- कुंभसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- वृश्चिक
- सूर्योदय
- सुबह 7:00
- सूर्यास्त
- शाम 5:24
- चंद्रोदय
- दोपहर 12:27
- चंद्रास्त
- इस दिन नहीं
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:24 से सुबह 6:12 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:51 से दोपहर 12:33 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 1:56 से दोपहर 2:38 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 8:18 से सुबह 9:36 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 10:54 से दोपहर 12:12 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 1:30 से दोपहर 2:48 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। दिसंबर 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
कूर्म पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण
संस्कृत · उनतालीस में से एक
छाया वाली सीता की कथा का पुराना स्रोत। रावण के आने पर अग्नि असली सीता को अपने पास रख लेते हैं, और रावण उनकी छाया ले जाता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में यही छाया आगे वेदवती से जुड़ती है। यह विचार अध्यात्म रामायण और मानस तक पहुँचा।