आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · मार्गशीर्ष
29 नवंबर 2027 का पंचांग
सोमवार · मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदा
29 नवंबर 2027, सोमवार को मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदा है, सुबह 9:14 तक; उसके बाद द्वितीया। नक्षत्र ज्येष्ठा है, रात 7:48 तक। सूर्योदय सुबह 6:54 और सूर्यास्त शाम 5:24। राहु काल सुबह 8:13 से सुबह 9:32 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
त्योहार
इस दिन कोई बड़ा त्योहार नहीं
अगला त्योहार: विवाह पंचमी · राम सीता विवाह, 3 दिसंबर 2027, शुक्रवार।
पंचांग
29 नवंबर 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदासुबह 9:14 तक, फिर द्वितीया
- नक्षत्र
- ज्येष्ठारात 7:48 तक, फिर मूल
- योग
- धृति30 नवंबर, रात 2:30 तक, फिर शूल
- करण
- बवसुबह 9:14 तक
- वार
- सोमवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- वृश्चिकसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- वृश्चिक
- सूर्योदय
- सुबह 6:54
- सूर्यास्त
- शाम 5:24
- चंद्रोदय
- सुबह 8:00
- चंद्रास्त
- शाम 6:15
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:18 से सुबह 6:06 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:48 से दोपहर 12:30 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 1:54 से दोपहर 2:36 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 8:13 से सुबह 9:32 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 10:51 से दोपहर 12:09 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 1:28 से दोपहर 2:47 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। नवंबर 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
यम ज़ातदो
बर्मी · उनतालीस में से एक
बर्मा की रामकथा, जिसका नाम यम ज़ातदो है, यानी राम की जातक कथा। बर्मा में यह कथा मंच की कथा है, और वहाँ के लोग इसे अपनी जातक कथाओं में गिनते हैं। लिखे हुए पाठ से ज़्यादा यह खेली जाने वाली कथा है।