आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · मार्गशीर्ष
19 नवंबर 2027 का पंचांग
शुक्रवार · मार्गशीर्ष कृष्ण षष्ठी
19 नवंबर 2027, शुक्रवार को मार्गशीर्ष कृष्ण षष्ठी है, रात 9:21 तक; उसके बाद सप्तमी। नक्षत्र पुष्य है, 20 नवंबर, रात 12:28 तक। सूर्योदय सुबह 6:47 और सूर्यास्त शाम 5:26। राहु काल सुबह 10:46 से दोपहर 12:06 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
त्योहार
इस दिन कोई बड़ा त्योहार नहीं
अगला त्योहार: विवाह पंचमी · राम सीता विवाह, 3 दिसंबर 2027, शुक्रवार।
पंचांग
19 नवंबर 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- मार्गशीर्ष कृष्ण षष्ठीरात 9:21 तक, फिर सप्तमी
- नक्षत्र
- पुष्य20 नवंबर, रात 12:28 तक, फिर आश्लेषा
- योग
- शुक्ल20 नवंबर, रात 1:03 तक, फिर ब्रह्म
- करण
- गरसुबह 10:24 तक
- वार
- शुक्रवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)कार्तिक (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- कर्कसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- वृश्चिक
- सूर्योदय
- सुबह 6:47
- सूर्यास्त
- शाम 5:26
- चंद्रोदय
- रात 10:37
- चंद्रास्त
- सुबह 11:35
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:11 से सुबह 5:59 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:45 से दोपहर 12:28 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 1:53 से दोपहर 2:36 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 10:46 से दोपहर 12:06 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 2:46 से शाम 4:06 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 8:06 से सुबह 9:26 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। नवंबर 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
रामायण कल्पवृक्षम्
तेलुगु · उनतालीस में से एक
तेलुगु की वह रामकथा जिसे विश्वनाथ सत्यनारायण ने बीसवीं सदी में रचा और जिसका नाम है रामायण कल्पवृक्षम्। यह उस समय लिखी गई जब लोग कह रहे थे कि अब पुरानी कथाओं का ज़माना गया। कवि ने वही कथा दोबारा कही, अपने ढंग से, और उसी पर उन्हें ज्ञानपीठ मिला। यह बताता है कि यह कथा किसी पुरानी सदी में बंद नहीं हुई।