आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · कार्तिक
17 अक्टूबर 2027 का पंचांग
रविवार · कार्तिक कृष्ण द्वितीया
17 अक्टूबर 2027, रविवार को कार्तिक कृष्ण द्वितीया है, शाम 6:44 तक; उसके बाद तृतीया। नक्षत्र भरणी है, 18 अक्टूबर, रात 12:04 तक। सूर्योदय सुबह 6:23 और सूर्यास्त शाम 5:50। राहु काल शाम 4:24 से शाम 5:50 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
17 अक्टूबर 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- कार्तिक कृष्ण द्वितीयाशाम 6:44 तक, फिर तृतीया
- नक्षत्र
- भरणी18 अक्टूबर, रात 12:04 तक, फिर कृत्तिका
- योग
- वज्रदोपहर 1:03 तक, फिर सिद्धि
- करण
- तैतिलसुबह 7:02 तक
- वार
- रविवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- कार्तिक (पूर्णिमांत)आश्विन (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- मेषसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- कन्या
- सूर्योदय
- सुबह 6:23
- सूर्यास्त
- शाम 5:50
- चंद्रोदय
- शाम 6:44
- चंद्रास्त
- सुबह 7:57
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:47 से सुबह 5:35 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:44 से दोपहर 12:29 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:01 से दोपहर 2:47 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- शाम 4:24 से शाम 5:50 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 12:06 से दोपहर 1:32 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 2:58 से शाम 4:24 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। अक्टूबर 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
रामावतारचरित
कश्मीरी · उनतालीस में से एक
कश्मीरी की रामकथा, रामावतारचरित, जिसे प्रकाश राम ने उन्नीसवीं सदी में रचा। यहाँ सीता रावण और मंदोदरी की बेटी हैं, जिन्हें जन्म के बाद छोड़ दिया गया। रावण और लंका के बनने की कथा सुंदरकांड के भीतर आती है, और पूरी कथा में कश्मीर का खाना, कपड़े और रीति रिवाज भरे हैं।