आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · आश्विन
10 अक्टूबर 2027 का पंचांग
रविवार · आश्विन शुक्ल दशमी
10 अक्टूबर 2027, रविवार को आश्विन शुक्ल दशमी है, सुबह 11:41 तक; उसके बाद एकादशी। नक्षत्र श्रवण है, दोपहर 1:26 तक। सूर्योदय सुबह 6:19 और सूर्यास्त शाम 5:57। राहु काल शाम 4:30 से शाम 5:57 तक है। इस दिन भरत मिलाप है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
10 अक्टूबर 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- आश्विन शुक्ल दशमीसुबह 11:41 तक, फिर एकादशी
- नक्षत्र
- श्रवणदोपहर 1:26 तक, फिर धनिष्ठा
- योग
- धृतिदोपहर 2:54 तक, फिर शूल
- करण
- गरसुबह 11:41 तक
- वार
- रविवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- आश्विन (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- मकरसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- कन्या
- सूर्योदय
- सुबह 6:19
- सूर्यास्त
- शाम 5:57
- चंद्रोदय
- दोपहर 3:01
- चंद्रास्त
- रात 1:26
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:43 से सुबह 5:31 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:45 से दोपहर 12:31 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:05 से दोपहर 2:51 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- शाम 4:30 से शाम 5:57 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 12:08 से दोपहर 1:35 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 3:03 से शाम 4:30 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। अक्टूबर 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
सिद्धि रामायण
नेपाल भाषा · उनतालीस में से एक
नेपाल भाषा यानी नेवारी में लिखी रामकथा, जिसे सिद्धिदास महाजु ने बीसवीं सदी की शुरुआत में रचा। नेपाल में एक ही समय कई भाषाएँ चलती हैं, और यह उस दूसरी भाषा की रामकथा है, भानुभक्त वाली नेपाली से अलग। एक ही देश, दो ज़बानें, और दोनों में अपनी अपनी रामकथा।
