आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · आश्विन
19 सितंबर 2027 का पंचांग
रविवार · आश्विन कृष्ण तृतीया
19 सितंबर 2027, रविवार को आश्विन कृष्ण तृतीया है, सुबह 7:10 तक; उसके बाद चतुर्थी। नक्षत्र अश्विनी है, शाम 5:41 तक। सूर्योदय सुबह 6:08 और सूर्यास्त शाम 6:22। राहु काल शाम 4:50 से शाम 6:22 तक है। इस दिन संकष्टी चतुर्थी है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
19 सितंबर 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- आश्विन कृष्ण तृतीयासुबह 7:10 तक, फिर चतुर्थी
- नक्षत्र
- अश्विनीशाम 5:41 तक, फिर भरणी
- योग
- ध्रुवसुबह 8:19 तक, फिर व्याघात
- करण
- विष्टि (भद्रा)सुबह 7:10 तक
- वार
- रविवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- आश्विन (पूर्णिमांत)भाद्रपद (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- मेषसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- कन्या
- सूर्योदय
- सुबह 6:08
- सूर्यास्त
- शाम 6:22
- चंद्रोदय
- रात 8:04
- चंद्रास्त
- सुबह 9:04
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:32 से सुबह 5:20 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:50 से दोपहर 12:39 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:17 से दोपहर 3:06 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- शाम 4:50 से शाम 6:22 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 12:15 से दोपहर 1:47 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 3:18 से शाम 4:50 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। सितंबर 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
कूर्म पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण
संस्कृत · उनतालीस में से एक
छाया वाली सीता की कथा का पुराना स्रोत। रावण के आने पर अग्नि असली सीता को अपने पास रख लेते हैं, और रावण उनकी छाया ले जाता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में यही छाया आगे वेदवती से जुड़ती है। यह विचार अध्यात्म रामायण और मानस तक पहुँचा।