आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · भाद्रपद
29 अगस्त 2027 का पंचांग
रविवार · भाद्रपद कृष्ण द्वादशी
29 अगस्त 2027, रविवार को भाद्रपद कृष्ण द्वादशी है, सुबह 9:36 तक; उसके बाद त्रयोदशी। नक्षत्र पुनर्वसु है, सुबह 6:18 तक। सूर्योदय सुबह 5:58 और सूर्यास्त शाम 6:46। राहु काल शाम 5:10 से शाम 6:46 तक है। इस दिन प्रदोष व्रत है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
29 अगस्त 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- भाद्रपद कृष्ण द्वादशीसुबह 9:36 तक, फिर त्रयोदशी
- नक्षत्र
- पुनर्वसुसुबह 6:18 तक, फिर पुष्य
- योग
- व्यतीपातसुबह 9:28 तक, फिर वरीयान
- करण
- तैतिलसुबह 9:36 तक
- वार
- रविवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- भाद्रपद (पूर्णिमांत)श्रावण (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- कर्कसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- सिंह
- सूर्योदय
- सुबह 5:58
- सूर्यास्त
- शाम 6:46
- चंद्रोदय
- रात 2:53
- चंद्रास्त
- शाम 5:03
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:22 से सुबह 5:10 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:56 से दोपहर 12:48 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:30 से दोपहर 3:21 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- शाम 5:10 से शाम 6:46 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 12:22 से दोपहर 1:58 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 3:34 से शाम 5:10 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। अगस्त 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
रामचरितम्
पुराना मलयालम · उनतालीस में से एक
मलयालम की सबसे पुरानी बची हुई काव्य रचना, जिसे चीरामन ने लगभग बारहवीं सदी में रचा। इसमें कथा शुरू से नहीं चलती, सीधे लड़ाई वाले हिस्से से उठती है। यानी उस भाषा की शुरुआत ही लड़ाई वाले कांड से हुई, और भाषा भी ऐसी है जिसमें मलयालम और तमिल दोनों की छाया दिखती है।