आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · श्रावण
13 अगस्त 2027 का पंचांग
शुक्रवार · श्रावण शुक्ल द्वादशी
13 अगस्त 2027, शुक्रवार को श्रावण शुक्ल द्वादशी है, 14 अगस्त, सुबह 5:22 तक; उसके बाद त्रयोदशी। नक्षत्र मूल है, दोपहर 2:20 तक। सूर्योदय सुबह 5:49 और सूर्यास्त शाम 7:03। राहु काल सुबह 10:47 से दोपहर 12:26 तक है। इस दिन वरलक्ष्मी व्रत है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
13 अगस्त 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- श्रावण शुक्ल द्वादशी14 अगस्त, सुबह 5:22 तक, फिर त्रयोदशी
- नक्षत्र
- मूलदोपहर 2:20 तक, फिर पूर्वाषाढ़ा
- योग
- विष्कंभरात 9:30 तक, फिर प्रीति
- करण
- बवशाम 4:09 तक
- वार
- शुक्रवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- श्रावण (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- धनुसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- कर्क
- सूर्योदय
- सुबह 5:49
- सूर्यास्त
- शाम 7:03
- चंद्रोदय
- शाम 4:36
- चंद्रास्त
- रात 1:59
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:13 से सुबह 5:01 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:59 से दोपहर 12:52 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:38 से दोपहर 3:31 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 10:47 से दोपहर 12:26 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 3:44 से शाम 5:24 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 7:28 से सुबह 9:08 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। अगस्त 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
अद्भुत रामायण
संस्कृत · उनतालीस में से एक
शाक्त परंपरा की कथा, सत्ताईस सर्गों की, जिसमें सीता केंद्र में हैं। यहाँ सीता मंदोदरी से जन्मी बताई गई हैं। लंका के बाद पुष्कर द्वीप पर हज़ार सिर वाला एक और रावण खड़ा होता है; राम बेहोश हो जाते हैं, और उसे महाकाली बनकर सीता गिराती हैं।
