आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · श्रावण
4 अगस्त 2027 का पंचांग
बुधवार · श्रावण शुक्ल द्वितीया
4 अगस्त 2027, बुधवार को श्रावण शुक्ल द्वितीया है, सुबह 8:20 तक; उसके बाद तृतीया। नक्षत्र मघा है, सुबह 11:37 तक। सूर्योदय सुबह 5:44 और सूर्यास्त शाम 7:10। राहु काल दोपहर 12:27 से दोपहर 2:08 तक है। इस दिन हरियाली तीज है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
4 अगस्त 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- श्रावण शुक्ल द्वितीयासुबह 8:20 तक, फिर तृतीया
- नक्षत्र
- मघासुबह 11:37 तक, फिर पूर्वा फाल्गुनी
- योग
- वरीयानसुबह 10:28 तक, फिर परिघ
- करण
- कौलवसुबह 8:20 तक
- वार
- बुधवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- श्रावण (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- सिंहसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- कर्क
- सूर्योदय
- सुबह 5:44
- सूर्यास्त
- शाम 7:10
- चंद्रोदय
- सुबह 7:40
- चंद्रास्त
- रात 8:31
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:08 से सुबह 4:56 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- दोपहर 12:00 से दोपहर 12:54 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है। बुधवार को इसे नहीं लेते।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:41 से दोपहर 3:35 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 12:27 से दोपहर 2:08 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 7:25 से सुबह 9:06 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 10:46 से दोपहर 12:27 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। अगस्त 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
यम ज़ातदो
बर्मी · उनतालीस में से एक
बर्मा की रामकथा, जिसका नाम यम ज़ातदो है, यानी राम की जातक कथा। बर्मा में यह कथा मंच की कथा है, और वहाँ के लोग इसे अपनी जातक कथाओं में गिनते हैं। लिखे हुए पाठ से ज़्यादा यह खेली जाने वाली कथा है।
