आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · श्रावण
25 जुलाई 2027 का पंचांग
रविवार · श्रावण कृष्ण षष्ठी
25 जुलाई 2027, रविवार को श्रावण कृष्ण षष्ठी है, सुबह 9:53 तक; उसके बाद सप्तमी। नक्षत्र रेवती है, 26 जुलाई, सुबह 5:14 तक। सूर्योदय सुबह 5:38 और सूर्यास्त शाम 7:17। राहु काल शाम 5:34 से शाम 7:17 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
25 जुलाई 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- श्रावण कृष्ण षष्ठीसुबह 9:53 तक, फिर सप्तमी
- नक्षत्र
- रेवती26 जुलाई, सुबह 5:14 तक, फिर अश्विनी
- योग
- सुकर्मारात 8:04 तक, फिर धृति
- करण
- वणिजसुबह 9:53 तक
- वार
- रविवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- श्रावण (पूर्णिमांत)आषाढ़ (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- मीनसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- कर्क
- सूर्योदय
- सुबह 5:38
- सूर्यास्त
- शाम 7:17
- चंद्रोदय
- रात 10:50
- चंद्रास्त
- सुबह 11:19
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:02 से सुबह 4:50 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- दोपहर 12:00 से दोपहर 12:55 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:44 से दोपहर 3:38 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- शाम 5:34 से शाम 7:17 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 12:28 से दोपहर 2:10 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 3:52 से शाम 5:34 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। जुलाई 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
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- मुफ़्त
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इस दिन की रामकथा
रामायण कल्पवृक्षम्
तेलुगु · उनतालीस में से एक
तेलुगु की वह रामकथा जिसे विश्वनाथ सत्यनारायण ने बीसवीं सदी में रचा और जिसका नाम है रामायण कल्पवृक्षम्। यह उस समय लिखी गई जब लोग कह रहे थे कि अब पुरानी कथाओं का ज़माना गया। कवि ने वही कथा दोबारा कही, अपने ढंग से, और उसी पर उन्हें ज्ञानपीठ मिला। यह बताता है कि यह कथा किसी पुरानी सदी में बंद नहीं हुई।