आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · ज्येष्ठ
12 जून 2027 का पंचांग
शनिवार · ज्येष्ठ शुक्ल नवमी
12 जून 2027, शनिवार को ज्येष्ठ शुक्ल नवमी है, 13 जून, रात 2:45 तक; उसके बाद दशमी। नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी है, शाम 5:00 तक। सूर्योदय सुबह 5:23 और सूर्यास्त शाम 7:19। राहु काल सुबह 8:52 से सुबह 10:36 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
12 जून 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- ज्येष्ठ शुक्ल नवमी13 जून, रात 2:45 तक, फिर दशमी
- नक्षत्र
- उत्तरा फाल्गुनीशाम 5:00 तक, फिर हस्त
- योग
- सिद्धिसुबह 10:49 तक, फिर व्यतीपात
- करण
- बालवदोपहर 3:11 तक
- वार
- शनिवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- ज्येष्ठ (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- कन्यासूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- वृषभ
- सूर्योदय
- सुबह 5:23
- सूर्यास्त
- शाम 7:19
- चंद्रोदय
- दोपहर 1:11
- चंद्रास्त
- रात 12:34
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- रात 3:47 से सुबह 4:35 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:53 से दोपहर 12:49 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:40 से दोपहर 3:36 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 8:52 से सुबह 10:36 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 2:06 से दोपहर 3:50 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 5:23 से सुबह 7:07 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। जून 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
रामचरितम्
पुराना मलयालम · उनतालीस में से एक
मलयालम की सबसे पुरानी बची हुई काव्य रचना, जिसे चीरामन ने लगभग बारहवीं सदी में रचा। इसमें कथा शुरू से नहीं चलती, सीधे लड़ाई वाले हिस्से से उठती है। यानी उस भाषा की शुरुआत ही लड़ाई वाले कांड से हुई, और भाषा भी ऐसी है जिसमें मलयालम और तमिल दोनों की छाया दिखती है।