आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2083 · चैत्र
6 अप्रैल 2027 का पंचांग
मंगलवार · चैत्र अमावस्या
6 अप्रैल 2027, मंगलवार को चैत्र अमावस्या है, 7 अप्रैल, सुबह 5:21 तक; उसके बाद प्रतिपदा। नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद है, शाम 6:23 तक। सूर्योदय सुबह 6:06 और सूर्यास्त शाम 6:42। राहु काल दोपहर 3:33 से शाम 5:07 तक है। इस दिन चैत्र अमावस्या है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
6 अप्रैल 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- चैत्र अमावस्या7 अप्रैल, सुबह 5:21 तक, फिर प्रतिपदा
- नक्षत्र
- उत्तरा भाद्रपदशाम 6:23 तक, फिर रेवती
- योग
- ब्रह्मसुबह 8:51 तक, फिर ऐंद्र
- करण
- चतुष्पदशाम 5:35 तक
- वार
- मंगलवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- चैत्र (पूर्णिमांत)फाल्गुन (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2083
- चंद्र राशि
- मीनसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- मीन
- सूर्योदय
- सुबह 6:06
- सूर्यास्त
- शाम 6:42
- चंद्रोदय
- सुबह 5:23
- चंद्रास्त
- शाम 6:13
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:30 से सुबह 5:18 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:59 से दोपहर 12:49 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:30 से दोपहर 3:20 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 3:33 से शाम 5:07 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 9:15 से सुबह 10:49 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 12:24 से दोपहर 1:58 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। अप्रैल 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
गिरधर रामायण
गुजराती · उनतालीस में से एक
गुजराती की वह रामकथा जिसे गिरधर ने सन 1835 में पूरा किया। उन्होंने कथा मुख्य रूप से वाल्मीकि और हनुमन्नाटक से ली, और उसे सीधी सादी भाषा में लिखा। सबसे बड़ी बात इसका संगीत है: यह कई रागों और छंदों में बँधी है, जैसे धनाश्री, बिलावल, मारू, सोरठ और आसावरी, इसलिए इसे पढ़ा कम और गाया ज़्यादा जाता है।