आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2083 · चैत्र
23 मार्च 2027 का पंचांग
मंगलवार · चैत्र कृष्ण प्रतिपदा
23 मार्च 2027, मंगलवार को चैत्र कृष्ण प्रतिपदा है, दोपहर 2:29 तक; उसके बाद द्वितीया। नक्षत्र हस्त है, रात 7:50 तक। सूर्योदय सुबह 6:22 और सूर्यास्त शाम 6:34। राहु काल दोपहर 3:31 से शाम 5:02 तक है। इस दिन होली है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
23 मार्च 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- चैत्र कृष्ण प्रतिपदादोपहर 2:29 तक, फिर द्वितीया
- नक्षत्र
- हस्तरात 7:50 तक, फिर चित्रा
- योग
- वृद्धिसुबह 11:28 तक, फिर ध्रुव
- करण
- कौलवदोपहर 2:29 तक
- वार
- मंगलवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- चैत्र (पूर्णिमांत)फाल्गुन (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2083
- चंद्र राशि
- कन्यासूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- मीन
- सूर्योदय
- सुबह 6:22
- सूर्यास्त
- शाम 6:34
- चंद्रोदय
- रात 7:40
- चंद्रास्त
- सुबह 6:33
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:46 से सुबह 5:34 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- दोपहर 12:04 से दोपहर 12:52 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:30 से दोपहर 3:19 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 3:31 से शाम 5:02 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 9:25 से सुबह 10:57 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 12:28 से दोपहर 2:00 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। मार्च 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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इस दिन की रामकथा
कण्णस्स रामायणम्
मलयालम · उनतालीस में से एक
मलयालम की उस दौर की रामकथा जिसे निरणम के राम पणिक्कर ने चौदहवीं सदी में रचा, और जिसे कण्णस्स रामायणम् कहते हैं। एषुत्तच्छन से यह पुरानी है, और इसी तरह की रचनाओं ने उस भाषा को कथा कहने लायक बनाया। यह काम निरणम वाले कवियों के नाम से जाना जाता है।
