आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2083 · माघ
19 फ़रवरी 2027 का पंचांग
शुक्रवार · माघ शुक्ल त्रयोदशी
19 फ़रवरी 2027, शुक्रवार को माघ शुक्ल त्रयोदशी है, सुबह 11:15 तक; उसके बाद चतुर्दशी। नक्षत्र पुष्य है, शाम 6:36 तक। सूर्योदय सुबह 6:56 और सूर्यास्त शाम 6:14। राहु काल सुबह 11:11 से दोपहर 12:35 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
19 फ़रवरी 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- माघ शुक्ल त्रयोदशीसुबह 11:15 तक, फिर चतुर्दशी
- नक्षत्र
- पुष्यशाम 6:36 तक, फिर आश्लेषा
- योग
- सौभाग्यशाम 6:59 तक, फिर शोभन
- करण
- तैतिलसुबह 11:15 तक
- वार
- शुक्रवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- माघ (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2083
- चंद्र राशि
- कर्कसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- कुंभ
- सूर्योदय
- सुबह 6:56
- सूर्यास्त
- शाम 6:14
- चंद्रोदय
- शाम 4:32
- चंद्रास्त
- सुबह 5:36
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:20 से सुबह 6:08 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- दोपहर 12:13 से दोपहर 12:58 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:28 से दोपहर 3:13 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- सुबह 11:11 से दोपहर 12:35 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- दोपहर 3:25 से शाम 4:49 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 8:21 से सुबह 9:46 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। फ़रवरी 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
दूसरा कैलेंडर: iPhone या Mac · Google · Outlook · फ़ाइल
इस दिन की रामकथा
रामायण कल्पवृक्षम्
तेलुगु · उनतालीस में से एक
तेलुगु की वह रामकथा जिसे विश्वनाथ सत्यनारायण ने बीसवीं सदी में रचा और जिसका नाम है रामायण कल्पवृक्षम्। यह उस समय लिखी गई जब लोग कह रहे थे कि अब पुरानी कथाओं का ज़माना गया। कवि ने वही कथा दोबारा कही, अपने ढंग से, और उसी पर उन्हें ज्ञानपीठ मिला। यह बताता है कि यह कथा किसी पुरानी सदी में बंद नहीं हुई।