आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2083 · कार्तिक
27 अक्टूबर 2026 का पंचांग
मंगलवार · कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा
27 अक्टूबर 2026, मंगलवार को कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा है, सुबह 7:02 तक; उसके बाद द्वितीया। नक्षत्र भरणी है, दोपहर 3:39 तक। सूर्योदय सुबह 6:29 और सूर्यास्त शाम 5:40। राहु काल दोपहर 2:53 से शाम 4:16 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
27 अक्टूबर 2026 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- कार्तिक कृष्ण प्रतिपदासुबह 7:02 तक, फिर द्वितीया
- नक्षत्र
- भरणीदोपहर 3:39 तक, फिर कृत्तिका
- योग
- सिद्धिसुबह 10:53 तक, फिर व्यतीपात
- करण
- कौलवसुबह 7:02 तक
- वार
- मंगलवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- महीना
- कार्तिक (पूर्णिमांत)आश्विन (अमांत, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में)
- संवत
- विक्रम संवत 2083
- चंद्र राशि
- मेषसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- तुला
- सूर्योदय
- सुबह 6:29
- सूर्यास्त
- शाम 5:40
- चंद्रोदय
- शाम 6:19
- चंद्रास्त
- सुबह 7:36
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:53 से सुबह 5:41 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:43 से दोपहर 12:27 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 1:57 से दोपहर 2:41 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 2:53 से शाम 4:16 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 9:17 से सुबह 10:41 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 12:05 से दोपहर 1:29 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। अक्टूबर 2026 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
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इस दिन की रामकथा
रामावतार
ब्रजभाषा · उनतालीस में से एक
दसम ग्रंथ के चौबीस अवतार में बीसवाँ, राम अवतार। ब्रजभाषा में है और गुरमुखी लिपि में लिखा है, और परंपरा इसे गुरु गोबिंद सिंह की रचना मानती है। यह 1698 में सतलुज के किनारे, नैना देवी पहाड़ी के नीचे पूरा हुआ। इसमें पूरा सुंदरकांड एक ही छंद में है: हनुमान जी अँगूठी लेकर जाते हैं, नगर जलाते हैं, अक्षय कुमार को मारते हैं और लौट आते हैं। इसके आख़िरी सवैया और दोहा आज भी रोज़ रहरास साहिब में पढ़े जाते हैं।