आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2084 · आश्विन
12 अक्टूबर 2027 का पंचांग
मंगलवार · आश्विन शुक्ल द्वादशी
12 अक्टूबर 2027, मंगलवार को आश्विन शुक्ल द्वादशी है, शाम 4:14 तक; उसके बाद त्रयोदशी। नक्षत्र शतभिषा है, शाम 6:56 तक। सूर्योदय सुबह 6:20 और सूर्यास्त शाम 5:55। राहु काल दोपहर 3:01 से शाम 4:28 तक है। इस दिन भौम प्रदोष व्रत है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
12 अक्टूबर 2027 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- आश्विन शुक्ल द्वादशीशाम 4:14 तक, फिर त्रयोदशी
- नक्षत्र
- शतभिषाशाम 6:56 तक, फिर पूर्वा भाद्रपद
- योग
- गंडशाम 4:20 तक, फिर वृद्धि
- करण
- बालवशाम 4:14 तक
- वार
- मंगलवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- आश्विन (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2084
- चंद्र राशि
- कुंभसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- कन्या
- सूर्योदय
- सुबह 6:20
- सूर्यास्त
- शाम 5:55
- चंद्रोदय
- शाम 4:00
- चंद्रास्त
- रात 3:13
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:44 से सुबह 5:32 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:44 से दोपहर 12:31 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:03 से दोपहर 2:50 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 3:01 से शाम 4:28 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 9:14 से सुबह 10:41 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 12:08 से दोपहर 1:34 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। अक्टूबर 2027 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
दूसरा कैलेंडर: iPhone या Mac · Google · Outlook · फ़ाइल
इस दिन की रामकथा
रामचंद्र चरित पुराण
कन्नड़ · उनतालीस में से एक
कन्नड़ की सबसे पुरानी बची हुई रामकथा, जैन परंपरा की, जिसे नागचंद्र ने लगभग 1100 ईस्वी में रचा। नागचंद्र को अभिनव पंप यानी नए पंप कहा गया, इसलिए इसे पंप रामायण भी कहते हैं। यहाँ रावण को लक्ष्मण मारते हैं, और रावण एक दुखी नायक है।