आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2083 · मार्गशीर्ष
22 दिसंबर 2026 का पंचांग
मंगलवार · मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी
22 दिसंबर 2026, मंगलवार को मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी है, दोपहर 2:24 तक; उसके बाद चतुर्दशी। नक्षत्र कृत्तिका है, सुबह 10:46 तक। सूर्योदय सुबह 7:10 और सूर्यास्त शाम 5:29। राहु काल दोपहर 2:54 से शाम 4:12 तक है। इस दिन हनुमद व्रत (कर्नाटक) है। समय नई दिल्ली के हैं।
पंचांग
22 दिसंबर 2026 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशीदोपहर 2:24 तक, फिर चतुर्दशी
- नक्षत्र
- कृत्तिकासुबह 10:46 तक, फिर रोहिणी
- योग
- साध्यरात 9:32 तक, फिर शुभ
- करण
- तैतिलदोपहर 2:24 तक
- वार
- मंगलवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2083
- चंद्र राशि
- वृषभसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- धनु
- सूर्योदय
- सुबह 7:10
- सूर्यास्त
- शाम 5:29
- चंद्रोदय
- दोपहर 3:33
- चंद्रास्त
- सुबह 5:07
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:34 से सुबह 6:22 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:59 से दोपहर 12:40 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 2:03 से दोपहर 2:44 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 2:54 से शाम 4:12 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 9:45 से सुबह 11:02 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- दोपहर 12:20 से दोपहर 1:37 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। दिसंबर 2026 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
अद्भुत रामायण
संस्कृत · उनतालीस में से एक
शाक्त परंपरा की कथा, सत्ताईस सर्गों की, जिसमें सीता केंद्र में हैं। यहाँ सीता मंदोदरी से जन्मी बताई गई हैं। लंका के बाद पुष्कर द्वीप पर हज़ार सिर वाला एक और रावण खड़ा होता है; राम बेहोश हो जाते हैं, और उसे महाकाली बनकर सीता गिराती हैं।