आज · दिन का पंचांग · विक्रम संवत 2083 · मार्गशीर्ष
10 दिसंबर 2026 का पंचांग
गुरुवार · मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदा
10 दिसंबर 2026, गुरुवार को मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदा है, सुबह 8:47 तक; उसके बाद द्वितीया। नक्षत्र मूल है, रात 11:58 तक। सूर्योदय सुबह 7:03 और सूर्यास्त शाम 5:25। राहु काल दोपहर 1:32 से दोपहर 2:49 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
त्योहार
इस दिन कोई बड़ा त्योहार नहीं
अगला त्योहार: विवाह पंचमी · राम सीता विवाह, 14 दिसंबर 2026, सोमवार।
पंचांग
10 दिसंबर 2026 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण
- तिथि
- मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदासुबह 8:47 तक, फिर द्वितीया
- नक्षत्र
- मूलरात 11:58 तक, फिर पूर्वाषाढ़ा
- योग
- शूलसुबह 9:25 तक, फिर गंड
- करण
- बवसुबह 8:47 तक
- वार
- गुरुवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- महीना
- मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)अमांत गिनती में भी यही
- संवत
- विक्रम संवत 2083
- चंद्र राशि
- धनुसूर्योदय के समय
- सूर्य राशि
- वृश्चिक
- सूर्योदय
- सुबह 7:03
- सूर्यास्त
- शाम 5:25
- चंद्रोदय
- सुबह 8:11
- चंद्रास्त
- शाम 6:20
मुहूर्त
इस दिन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 5:27 से सुबह 6:15 तकसूर्योदय से पहले के 96 से 48 मिनट: ध्यान, पाठ और पढ़ाई का समय।
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:53 से दोपहर 12:35 तकदिन के ठीक बीच का मुहूर्त, नए काम के लिए अच्छा माना जाता है।
- विजय मुहूर्त
- दोपहर 1:57 से दोपहर 2:39 तकदिन के पंद्रह हिस्सों में ग्यारहवाँ।
इस दिन कब न शुरू करें
- राहु काल
- दोपहर 1:32 से दोपहर 2:49 तकइस समय नया काम शुरू नहीं करते।
- यमगंड
- सुबह 7:03 से सुबह 8:21 तकइसे भी शुभ काम के लिए टालते हैं।
- गुलिक काल
- सुबह 9:38 से सुबह 10:56 तकदक्षिण भारत में इसे भी देखते हैं।
सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होगा। दिसंबर 2026 का पूरा महीना
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
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- मुफ़्त
- कोई साइन अप नहीं
- नाम, नंबर या ईमेल नहीं
- जब चाहें हटा दें
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इस दिन की रामकथा
गिरधर रामायण
गुजराती · उनतालीस में से एक
गुजराती की वह रामकथा जिसे गिरधर ने सन 1835 में पूरा किया। उन्होंने कथा मुख्य रूप से वाल्मीकि और हनुमन्नाटक से ली, और उसे सीधी सादी भाषा में लिखा। सबसे बड़ी बात इसका संगीत है: यह कई रागों और छंदों में बँधी है, जैसे धनाश्री, बिलावल, मारू, सोरठ और आसावरी, इसलिए इसे पढ़ा कम और गाया ज़्यादा जाता है।