उपनिषदों के प्रसिद्ध वाक्य · छान्दोग्य उपनिषद्
तत् त्वम् असि
तुम वही हो
तत् त्वम् असि छान्दोग्य उपनिषद् का वाक्य है। पिता उद्दालक आरुणि अपने बेटे श्वेतकेतु को नौ अलग उदाहरणों से एक ही बात समझाते हैं, और हर बार इसी वाक्य पर लौटते हैं: श्वेतकेतु, वह तुम हो। पहली बार यह ६.८.७ में आता है।
पूरा मंत्र
स य एषोऽणिमैतदात्म्यमिदꣳ सर्वं तत्सत्यꣳ स आत्मा तत्त्वमसि श्वेतकेतो इति भूय एव मा भगवान्विज्ञापयत्विति तथा सोम्येति होवाच ॥ ७ ॥
छान्दोग्य उपनिषद् ६.८.७
वह जो सबसे सूक्ष्म है, यह सारा जगत् उसी से बना है। वही सच है, वही आत्मा है। श्वेतकेतु, वह तुम हो। (श्वेतकेतु बोला) भगवन्, मुझे और समझाइए। (पिता ने) कहा, ठीक है, प्यारे।
मंत्र का पाठ शृंगेरी की अद्वैत शारदा वाली मूल प्रति से है, और GRETIL की प्रति और सामवेद के उपनिषदों के एक संग्रह से मिलाया गया है। नौ जगहों की गिनती तीनों प्रतियों में अलग अलग की गई, और तीनों में नौ निकली।
हर शब्द का अर्थ
- स यः एषः अणिमा
- वह जो यह सबसे सूक्ष्म है
- ऐतदात्म्यम् इदं सर्वम्
- यह सब उसी से बना है
- तत् सत्यम्
- वह सच है
- स आत्मा
- वह आत्मा है
- तत् त्वम् असि
- वह तुम हो
- श्वेतकेतो
- हे श्वेतकेतु
- भूय एव मा विज्ञापयतु
- मुझे और समझाइए
- तथा सोम्य
- ठीक है, प्यारे
किसने, किससे, कब
श्वेतकेतु बारह साल पढ़कर चौबीस की उम्र में घर लौटा, और अपने को बहुत ज्ञानी समझने लगा (छान्दोग्य उपनिषद् ६.१.२)। पिता ने पूछा, क्या तुमने वह सीखा, जिससे बिन सुना सुना हुआ हो जाता है (६.१.३)?
फिर पिता उसे सिखाते हैं कि सब कुछ सत् से, यानी जो है उससे, निकला है। हर बार श्वेतकेतु कहता है, मुझे और समझाइए, और पिता एक नया उदाहरण देकर उसी वाक्य पर लौटते हैं।
नौ बार, नौ उदाहरण
- ६.८.७ · नींद, भूख, प्यास, और मरते समय सब का सत् में लौटना
- ६.९.४ · मधुमक्खियाँ और शहद
- ६.१०.३ · नदियाँ और समुद्र
- ६.११.३ · जीता हुआ पेड़
- ६.१२.३ · बरगद का बीज
- ६.१३.३ · पानी में घुला नमक
- ६.१४.३ · आँखों पर पट्टी बँधा गांधार का आदमी
- ६.१५.३ · मरता हुआ आदमी
- ६.१६.३ · गरम कुल्हाड़ी की परीक्षा
और जानने की बातें
तत्त्वमसि या तत् त्वम् असि
मूल पाठ में यह जुड़ा हुआ लिखा है, तत्त्वमसि। तत् त्वम् असि उसी को तीन शब्दों में तोड़कर लिखना है: तत्, यानी वह; त्वम्, यानी तुम; असि, यानी हो।
यह ꣳ चिह्न क्या है
मूल पाठ में इदꣳ और तत्सत्यꣳ पर एक ख़ास चिह्न है, जो सामवेद के पाठ में अनुस्वार की जगह लिखा जाता है। कई छपाइयों में यहाँ सीधा इदं और सत्यं मिलता है। शब्द वही हैं।
महावाक्य
अद्वैत वेदांत की परंपरा चार वाक्यों को महावाक्य कहती है, चार वेदों से एक एक: प्रज्ञानं ब्रह्म ऋग्वेद के ऐतरेय उपनिषद् से, अहं ब्रह्मास्मि यजुर्वेद के बृहदारण्यक उपनिषद् से, तत् त्वम् असि सामवेद के छान्दोग्य उपनिषद् से, और अयमात्मा ब्रह्म अथर्ववेद के माण्डूक्य उपनिषद् से।
नेति नेति, एक ध्यान डायरी
यह उपनिषद्, इस डायरी में
नेति नेति डायरी के ग्रंथों में छान्दोग्य उपनिषद् के बारे में यही लिखा है:
सामवेद का उपनिषद्। तत् त्वम् असि यहीं है (६.८.७)।
डायरी में यह उपनिषद् इन अध्यायों के सामने रखा गया: तीसरा भाग, ध्वनि, चौथा भाग, आयाम।