पंचांग 2027

नेति नेति · पढ़ने और लिखने का तरीक़ा

ध्यान डायरी कैसे लिखें

हर दिन, तीन चीज़ें

नेति नेति, मनु विश्रांति की ध्यान डायरी, एक सीधे तरीक़े से बनी है। पहले उनके अपने शब्दों में यह तरीक़ा, फिर यह कि कोई भी अपनी डायरी इसी तरह कैसे लिख सकता है।

यह डायरी कैसे बनी

जो पंक्ति ध्यान में उतरी उसे उसी दिन उतार लेता रहा।

फिर हर पंक्ति किसी ग्रंथ के एक श्लोक के सामने रखी गई।

कभी वह मेरी बात के साथ खड़ा हुआ, कभी उसने उसे काट दिया, और कई बार उसने वही बात इतनी साफ़ कह दी कि मेरा पूरा पन्ना बेकार हो गया।

मैंने अपनी किसी पंक्ति को बचाया नहीं। जो गिरी उसे गिरा हुआ लिखा, जो अधूरी रह गई उसे खुला छोड़ा, और जो सही निकली उसके आगे भी यह लिखा कि वह किस हद तक सही है।

हर दिन, तीन चीज़ें

हर दिन तीन चीज़ें हैं। ऊपर वह पंक्ति जो मेरे पन्ने पर पहले से पड़ी थी। बीच में वह श्लोक जो उस दिन सामने आया, अपनी संख्या और अपने अर्थ के साथ। नीचे मेरा हिसाब, कि उस भिड़ंत में से क्या बचा।

ऊपर

मेरी पंक्ति

बीच में

उस दिन का श्लोक

॥ संख्या ॥

नीचे

हिसाब

  • गिरी
  • खुली छोड़ी
  • किस हद तक सही

संस्कृत जानना ज़रूरी नहीं। हर श्लोक के नीचे उसका अर्थ है। हर पाठ और संख्या छपी हुई प्रति से मिलाई गई है, और जो न मिला वह छपा नहीं।

डायरी से एक उदाहरण

पहले भाग, मृत्यु और काल, का पहला अध्याय इस तरह खुलता है:

अध्याय एक · सहायक

दिन १ से ५

किसी के मरने पर कारण ढूँढ़ लिया जाता है, बीमारी, हादसा, कोई आदमी, और कारण मिलते ही बात बंद कर दी जाती है।

जो कभी नहीं गिना जाता वह यह है कि उस एक मौत के पीछे कितने हाथ थे और उनमें से कोई अपनी मर्ज़ी से नहीं चला था।

किसके सामने रखा गया: महाभारत, अनुशासन पर्व · खुला रहा, ये सहायक कौन हैं।

और उस भाग का श्लोक:

सर्वे कालात्मकाः सर्प कालात्मकमिदं जगत्॥

महाभारत, अनुशासन पर्व १.५४

सब कालात्मक हैं। यह सारा जगत् कालात्मक है।

अपनी डायरी इसी तरह

यह तरीक़ा किसी के भी काम आ सकता है जो ध्यान करता है और अपने मन में उतरी बातों को परखना चाहता है। छह छोटे क़दम:

  1. उसी दिन लिखो
    ध्यान के बाद जो बात मन में साफ़ उतरी, उसे उसी दिन एक पंक्ति में लिख लो। उसे सुंदर बनाने की कोशिश मत करो, जैसी आई वैसी लिखो।
  2. एक ग्रंथ सामने रखो
    ऐसा ग्रंथ चुनो जिसका छपा हुआ पाठ तुम्हारे पास हो, जैसे भगवद्गीता या कोई उपनिषद्। अपनी पंक्ति के सामने वह एक श्लोक रखो जो उसी बात पर कुछ कहता हो।
  3. श्लोक की संख्या लिखो
    श्लोक के साथ उसकी संख्या लिखो, और यह भी कि पाठ किस छपी हुई प्रति से लिया। जिस श्लोक की संख्या पक्की न हो, उसे मत लिखो।
  4. हिसाब लिखो
    नीचे लिखो कि श्लोक के सामने तुम्हारी पंक्ति का क्या हुआ: गिरी, खुली छोड़ी, या किस हद तक सही।
  5. गिरी हुई पंक्ति मत मिटाओ
    जो पंक्ति श्लोक के सामने नहीं टिकी, उसे गिरा हुआ लिखकर वहीं रहने दो। बाद में यही पन्ने सबसे ज़्यादा सिखाते हैं।
  6. एक पंक्ति, एक बार
    हर नई पंक्ति को पहले लिखी पंक्तियों से मिला लो, ताकि एक ही बात दो बार न जाँची जाए।

नेति नेति डायरी देखिए

सवाल जवाब

पूछे जाने वाले सवाल

ध्यान डायरी क्या होती है?

पन्ने, जिन पर ध्यान में उतरी बात उसी दिन लिख ली जाती है। नेति नेति में हर ऐसी पंक्ति को बाद में किसी ग्रंथ के एक श्लोक के सामने रखकर जाँचा गया।

नेति नेति में हर दिन क्या लिखा है?

हर दिन तीन चीज़ें हैं। ऊपर वह पंक्ति जो मेरे पन्ने पर पहले से पड़ी थी। बीच में वह श्लोक जो उस दिन सामने आया, अपनी संख्या और अपने अर्थ के साथ। नीचे मेरा हिसाब, कि उस भिड़ंत में से क्या बचा।

हिसाब में क्या लिखा जाता है?

तीन में से एक बात: पंक्ति गिरी, खुली छोड़ी गई, या किस हद तक सही निकली।

अगर अपनी पंक्ति ग़लत निकले तो?

उसे मिटाया नहीं जाता। डायरी में लिखा है: जो गिरी उसे गिरा हुआ लिखा, जो अधूरी रह गई उसे खुला छोड़ा, और जो सही निकली उसके आगे भी यह लिखा कि वह किस हद तक सही है।

क्या इसके लिए संस्कृत आनी चाहिए?

संस्कृत जानना ज़रूरी नहीं। हर श्लोक के नीचे उसका अर्थ है। हर पाठ और संख्या छपी हुई प्रति से मिलाई गई है, और जो न मिला वह छपा नहीं।